येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर सुप्रीम कोर्ट ने नहीं लगाई रोक, कल होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस-जेडीएस की भाजपा विधायक दल के नेता बीएस येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण समारोह पर रोक लगाने की मांग को इनकार कर दिया।
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येदियुरप्पा का कब तक रहेगा ताज ?......................................
सुप्रीम कोर्ट में दलीलों का दौर जारी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस-जेडीएस की भाजपा विधायक दल के नेता बीएस येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण समारोह पर रोक लगाने की मांग को इनकार कर दिया। कांग्रेस की अर्जी पर तीन घंटे से अधिक चली सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्यपाल के फैसले पर रोक नहीं लगाई जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस और जेडीएस की याचिका खारिज नहीं की है लेकिन कहा, 'यह याचिका की बाद में सुनवाई का विषय है।'पहले इसके साथ ही दोनों पक्षों सहित बीएस येदियुरप्पा को भी एक जवाब दाखिल करने का नोटिस सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया है। बीएस येदियुरप्पा आज सुबह नौ बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस मामले पर शुक्रवार सुबह 10:30 बजे फिर तीन जजों की बेंच (जस्टिस भूषण, जस्टिस सीकरी और जस्टिस बोबडे) सुनवाई करेगी। सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय जनता पार्टी से विधायकों की लिस्ट भी मांगी है
इससे पहले, बुधवार को नाटकीय घटनाक्रम के बाद राज्यपाल वजुभाई वाला ने देर शाम भाजपा विधायक दल के नेता बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता दिया था। उन्हें बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय मिला। भाजपा को सरकार बनाने का न्योता मिलने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस-जेडी(एस) ने बुधवार रात में ही सुप्रीम कोर्ट में ज्वाइंट याचिका दायर की थी।
कोर्टरूम में आधी रात को चली सुनवाई के दौरान कांग्रेस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में दलील रखी कि जब किसी दल के पास बहुमत नहीं है तो राज्यपाल ने भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने के लिए क्यों आमंत्रित किया है। बीजेपी के पास सिर्फ 104 विधायक हैं। यह पूरी तरह से असंवैधानिक है। सिंघवी कहा कि राज्यपाल ने बहुमत साबित करने के लिए पहली बार किसी दल को 15 दिन का वक्त दिया, जबकि येदियुरप्पा ने 7 दिन का समय मांगा था।
सिंघवी ने गोवा का हवाला देकर कहा कि हमारे पास 117, जबकि बीजेपी के पास केवल 104 विधायक हैं तो फिर वह बहुमत कैसे साबित करेगी? उन्होंने कहा कि जब किसी दल के पास बहुमत नहीं है तो राज्यपाल ने भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने के लिए क्यों आमंत्रित किया है। बीजेपी के पास सिर्फ 104 विधायक हैं। यह पूरी तरह से असंवैधानिक है। जब तक 8 विधायक उनके साथ नहीं जाते तब तक वह बहुमत कैसे साबित कर सकते हैं? इतने विधायकों का टूटना कानूनन मान्य नहीं है।
वहीं, जस्टिस सीकरी ने कहा कि राज्यपाल ने अपने विवेक का इस्तेमाल किया, तो हम ऐसे मामले में दखल कैसे दे सकते हैं? ये फैसला सरकार की सलाह पर नहीं था, ये राज्यपाल के विशेषाधिकार का मामला है।
इससे पहले, बुधवार को भाजपा को सरकार बनाने का न्योता मिलने के कांग्रेस और जदएस भड़क गए। कांग्रेस ने राज्यपाल पर भाजपा की कठपुतली होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह पार्टी को बहुमत का जुगाड़ करने की इजाजत दे रहे हैं। पार्टी इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पार्टी ने राज्यपाल के फैसले को चुनौती देते हुए बुधवार रात को ही इस पर फैसला सुनाने का आग्रह किया है। सिंघवी ने बताया कि यह मामला बेहद गंभीर है।
